रूस अमेरिका के रिश्तों में तनाव और बढ़ा

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मॉस्को 31 july 2017
रूस ने अमेरिका द्वारा लगाए गए ताजा प्रतिबंधों के जवाब में 755 अमेरिकी राजनयिकों को देश छोड़कर जाने का आदेश दिया है। रूस का यह फैसला अमेरिका और उसके रिश्तों का तनाव और बढ़ा देगा। हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों हाउस ने लगभग एकमत होकर रूस पर ताजा प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अमेरिकी राजनयिकों को ‘रूस निकाला’ देने का ऐलान करते हुए राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने कहा कि वॉशिंगटन के ‘गैरकानूनी’ फैसले के खिलाफ यह मॉस्को की प्रतिक्रिया है। US कांग्रेस ने रूस पर यह प्रतिबंध लगाने के दो कारण गिनाए हैं। पहली वजह तो 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया को यूक्रेन से अलग करना है और दूसरा कारण 2016 के अमेरिकी चुनाव में मॉस्को द्वारा की गई कथित दखलंदाजी। मौजूदा स्थितियों में ट्रंप भले ही इस बैन का कितना भी विरोध करें, लेकिन अपनी साख बचाने के लिए उन्होंने इस बिल पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया है। पिछले साल दिसंबर में अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में बराक ओबामा ने 35 रूसी राजनयिकों को अमेरिका छोड़कर जाने का आदेश दिया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समय से ही डॉनल्ड ट्रंप और पुतिन के रिश्तों को लेकर काफी कुछ कहा और लिखा जा रहा है। ट्रंप और पुतिन की कथित नजदीकियों को देखते हुए माना जा रहा था कि अमेरिका और रूस के बीच कायम पुरानी होड़ व आक्रामकता कम होगी और उनके आपसी संबंध सुधरेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। रूस पर लगाए गए ताजा प्रतिबंधों के पीछे अमेरिकी कांग्रेस का हाथ है। ट्रंप इस बैन के पक्ष में नहीं थे। इस घटनाक्रम ने ट्रंप को अलग-थलग कर दिया। ट्रंप के सामने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करने का विकल्प है। वह चाहें तो वीटो का इस्तेमाल कर इस बैन को रद्द कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने पर उन्हें राजनैतिक तौर पर काफी नुकसान हो सकता है। रूस के साथ संबंधों को लेकर उनके ऊपर पहले से ही उंगली उठ रही है, अब अगर उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के फैसले को पलटा तो मॉस्को के प्रति नरम रवैया अपनाने के लिए वह और ज्यादा विवादों में घिर जाएंगे। यही वजह है कि ट्रंप ने इस बिल पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया है।

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