पनामा केस: पनाम केस: नबाज दोषी, कुसी छोड़ी

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इस्लामाबाद 28 जुलाई 2017
बड़ी खबर पाकिस्तान से आ रही है। प्रधानमंत्री नबाज शरीफ को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने पनामा केस में दोषी ठहराया है। अब वह प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, न तो पार्टी के अध्यक्ष रहेंगे। भ्रष्टाचार के मामले में पहली बार यह बड़ा फैसला है। फैसले के बाद पाकिस्तान में खासी हलचल है। प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे हैं।
पाकिस्‍तान सुप्रीम कोर्ट पनामा केस का फैसला शुक्रवार को सुनाया है। केस पाकिस्‍तान पीएम नवाज शरीफ और पाकिस्‍तान की सियासत के लिए काफी अहमियत रखता है। दरअसल इस मामले में नवाज शरीफ समेत उनके परिजनों पर काला धन छुपाने, भ्रष्‍टाचार और मनी लांड्रिंग के आरोप थे। फैसला आने के बाद नबाज को अपनी कुर्सी छोड़नी भी पड़ सकती है और उनका राजनीतिक भविष्‍य खतरे में पड़ गया है। सूरेतहाल में पाकिस्‍तान की सियासत में भूचाल हो सकता है और सेना एक बार फिर मजबूत स्थिति में आ सकती है।

इससे पहले 21 जुलाई को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस एजाज अफजल की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अपना फैसला सुनाने के लिए तुरंत कोई तारीख मुकर्रर नहीं की. पीठ में जस्टिस शेख अजमत सईद और जस्टिस एजाजुल अहसन शामिल हैं.

जस्टिस सईद ने कहा कि अदालत अपना फैसला सुनाते हुए किसी कानून से विचलित नहीं होगी. हम याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों के मौलिक अधिकारों के प्रति सचेत हैं.श्श् सुप्रीम कोर्ट ने दस खंडों वाली रिपोर्ट का अंतिम हिस्सा भी खोला जिसे संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने दाखिल की थी. उच्चतम न्यायालय ने शरीफ और उनके परिवार पर लगे धनशोधन के आरोपों की जांच के लिए जेआईटी गठित की थी.

जेआईटी ने कहा था कि रिपोर्ट का दसवां खंड गोपनीय रखा जाए क्योंकि इसमें दूसरे देशों के साथ पत्राचार का ब्‍यौरा है. शरीफ के वकीलों की टीम ने इस पर एतराज जताया था. अदालत ने अधिकारियों को आदेश दिया कि खंड की एक प्रति शरीफ के वकील ख्वाजा हारिस को सौंपी जाए.

कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए

नवाज शरीफ रिकॉर्ड तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। कभी राष्ट्रपति कायार्लय के जरिए, फिर सेना और अब न्यायापालिका द्वारा उनको सत्ता से बेदखल किया गया। शरीफ 1949 में लाहौर के अमीर उद्योगपति परिवार में पैदा हुए और उनकी शुरूआती शिक्षा अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में ही हुई। उन्होंने पंजाब विश्विवद्यालय से कानून की पढ़ाई की और फिर पिता की इस्पात कंपनी के साथ जुड़ गए। सैन्य शासक जियाउल हक के समय वह पहले वित्त मंत्री बने और फिर पंजाब के मुख्यमंत्री बने। फिर 1990 में वह पहली बार प्रधानमंत्री बने।

पाकिस्तान के सबसे रसूखदार सियासी परिवार और सत्तारूढ़ पार्टी पीएमएल-एन के मुखिया शरीफ जून, 2013 में तीसरे कार्यकाल में सत्ता पर आसीन होने के बाद से सभी सुनामी से पार पाने में सफल रहे, लेकिन पनामागेट मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें अयोग्य ठहरा दिया जो उनके करियर के लिए बहुत बड़ा झटका है।

 

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