संतजी से पढ़े पाठ के हर शब्द को साकार कर रहे सिद्धभाऊ

जन्म दिन पर विशेष: 23 दिसंबर

जीवन एक बार मिलता है, जी लो या जाया करो। यह आदमी पर निर्भर है। ज्यादातर लोग दुनिया में आते हैं और खुद की दुनिया में घिर कर जाते हैं। कुछ ही होते हैं, जो अपने निशां छोड़ते हैं। ऐसे लोग ही वर्तमान और भविष्य में याद किए जाते हैं। आदमी की सफलता का मापदंड इस भौतिकवादी दौर में व्यावसायिक ऊंचाइयां, उसकी चमक-दमक होने लगी है, लेकिन कुछ ऐसे भी बिरले हैं, जो भौतिकवाद से दूर अपने तय मापदंड और तय नियमों और सिद्धांतों के साथ जीवन जी रहे हैं।

ऐसे ही बिरले शख्स हैं संत हिरदाराम नगर को सेवा का तीर्थ बनाने वाले संत हिरदाराम जी के शिष्य सिद्धभाऊ। संतजी के महाप्रयाण के बाद जिस तरह सेवा के मिशन को उन्होंने अपने हाथ में लिया और वटवृक्ष से महावटवृक्ष में तब्दील कर दिया वह उनके समग्र व्यक्तित्व को रेखांकित करने वाला है। अपने गुरुजी (संत हिरदारामजी) से पढ़े पाठ बच्चे, बूढ़े और बीमार हैं परमेश्वर के यार। करें भावना से इनकी सेवा पाएंगे लोक-परलोक में सुख अपार का अक्षरश: पालन कर रहे हैं।

संत हिरदाराम जी के पंचतत्व में विलीन होने के बाद उनके कार्यो को आगे ले जाने में सिद्धभाऊ की कार्यशैली और नेतृत्व ने संतजी की प्रेरणा से चल रहीं संस्थाओं और सेवा कार्यो को लगातार ऊंचाइयां दीं। वे जब बच्चों के बीच होते हैं तो उनकी भाषा में उन्हें अपना लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देते हैं। जब दुखियों के बीच होते हैं तो उनकी आंखों के आंसू पोंछने का संकल्प उनके व्यक्तित्व में दिखता है। हर मौके पर मौजूदा पीढ़ी को बदलाव का रास्ता दिखाते हैं। संतनगर के हर परिवार का बच्चा उनका ऋणी है। यहीं कारण है विद्यार्थी भी उनके मार्गदर्शन में पढ़ाई करते हैं।

  • खास बातें
  • 23 दिसंबर 1953 को बैरागढ़ में जन्म हुआ।
  • परिवार ने नाम दिया होतचंद धनवानी।
  • सेफिया महाविद्यालय से साइंस से स्नातक ।
  • दूरसंचार विभाग में कई साल नौकरी की।
  • 25 साल तक शासकीय सेवा करने के बाद 1998 में सेवा निवृत्ति ली।
  • सेवा निवृत्ति के बाद अपने जीवन में संतजी के जीवन को आत्मसात कर लिया।

प्रभावशील व्यक्तित्व के धनी
शिक्षाविद् विष्णु गेहानी का कहना है सिद्धभाऊ के सानिध्य में आने वाला हर व्यक्ति उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। जीवन में यथार्थ सोच के साथ सहज जीवन जीने का पाठ उनका व्यक्तित्व ही पढ़ाता है।

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