खुद को बदले अभिभावक, सब ठीक हो जाएगा

आधुनिक युग में बच्चों को पालने की चुनौतियां एवं समाधान पर व्याख्यान
हिरदाराम नगर। 05 जनवरी 2019

अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक एंव अभिप्रेरक डॉ. एस.नीलकंठन में ऑडियो, वीडियो व गतिविधियों के माध्यम से नए जमाने में बच्चों को पालने की चुनौतियां और समाधान विषय पर अभिभावकों के सामने अपनी बात रखी। व्याख्यान में मिठी, नवनिध स्कूल में पढऩे वाले बच्चों के पालकों ने हिस्सा लिया।
संत हिरदाराम ऑडिटोरियम में डॉ. नीलकंठन ने बताया कि वर्तमान पीढ़ी में बदलाव आना जरूरी है ताकि लोगों की सोच बदल जाए। परिवार में माँ को इतना अधिक प्यार मिले कि परंपरा से चली आ रही लोगों की धारणा बदल जाए कि बच्चे की परवरिश में माँ तकलीफ उठाती है। नीलकंठन ने कहा कि माँ सरस्वती की आराधना करें, अपनी सोच को सकारात्मक बनाएँ, माँ प्रकृति के संदेशों पर ध्यान दें, सदैव ईश्वर एवं माता-पिता के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें, सभी के प्रति मधुर संबंध को बनाए रखे एवं स्वयं पर विश्वास रखें। आपने बताया कि जीवन के छह आयामों शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक, भावात्मक में संतुलन आवश्यक है अन्यथा संतुलन के अभाव में ये सभी डगमगा जाते है। किसी भी चीज को चिरस्थाई रखने के लिए उसका उचित रखरखाव आवश्यक है।
उन्होंने अभिभावकों व छात्राओं से अपील की कि आधुनिक परिवेश में समाज में बदलाव लाने हेतु पहले स्वयं में बदलाव लाना जरूरी है। नई सोच बनाएँ ताकि समाज का नवनिर्माण हो सके। घर के वातावरण को तनाव रहित रखें, दिन की शुरूआत शांति एवं प्रार्थना के साथ करें। इस अवसर पर संत सिद्धभाऊ ने बताया कि हमारे यहाँ बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा भी दी जाती है और यथोचित संस्कार भी दिए जाते हैं। माता-पिता एवं गुरूजनों की प्रेरणाओं को आत्मसात करने की सीख प्रदान की जाती है। आपने बताया कि हमारी शिक्षण सस्थाओं में विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखकर यथासमय शैक्षणिक सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रमिता दुबे परमार द्वारा किया गया।

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