मातृ भाषा में बात करने और संस्कृति को जीवित रखना जरूरी

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– संत सिद्ध भाऊ ने किया सिंधी समाज के फोल्डर का विमोचन
हिरदाराम नगर।23 feb 2018

स्वामी हिरदाराम सहिब के उत्तराधिकारी संत सिद्ध भाऊ ने कहा है कि किसी भी समाज की पहचान उसकी मातृ भाषा और संस्कृति होती है और इन दोनो को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है। यह बात उन्होंने अखिल भारतीय सिंधी समाज के दुबई में 8 से 12 मार्च को प्रस्तावित सिल्वर जुबली 25वें सम्मेलन के फोल्डर का विमोचन करते हुए कही।
समाज के राष्ट्रीय सह अध्यक्ष त्रिलोक दीपानी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सम्मेलन संयोजक प्रकाश मीरचंदानी, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेश जसवानी, सचिव राजेन्द्र मोटवानी के अलावा कार्यकारिणी सदस्य नरेश चोटरानी एवं रमेश जनयानी ने संत सिद्ध भाऊ को दुबई सम्मेलन की विस्तार से जानकारी प्रदान की। संत सिद्ध भाऊ ने फोल्डर का विमोचन करने के साथ ही सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी और सभी पदाधिकारियों को शाल ओढक़र आशीर्वाद भी दिया। साथ ही उन्होंने समाज के भीतर की बुराईयों को दूर कर समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय होता है तो उस समय राजनीतिक मतभेद भूलकर उसकी मदद करने पर जोर दिया। संत सिद्ध भाऊ ने जवाहर मार्ग पर अतिक्रमण विरोधी मुहिम में जिनका अधिक नुकसान हुआ ओर रोजगार छिन गया है, उन्हें साथ देने की भी बात समाज के लोगों से कही।
आपसी एकता की भी जरूरत
संत सिद्ध भाऊ ने कहा कि अब वह समय बीत चुका है, जब भारत देश में अलग से सिंध राज्य की कल्पना की गई थी अब तो समाज के भीतर एकता की जरूरत है। न केवल भारत बल्कि विश्व सिंधी समुदाय में एकजुटता हो ताकि न केवल सिंधी भाषा, कला, साहित्य, संस्कृति का उत्थान हो, सामाजिक कार्यो को अधिक गति मिले बल्कि भारत देश में समाज जिन अधिकारों से वंचित है, उन्हें भी एकता के जरिये हासिल किया जा सके।
संस्कृति को जीवित रखना जरूरी
संत सिद्ध भाऊ ने अपने वचनों में इस बात पर चिंता प्रकट की कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे अपनी मातृ भाषा को भूलते जा रहे हैं इसी तरह परम्परागत तीज त्योहार भी नहीं मनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावको को हर हालत में अपने बच्चों से सिंधी मातृ भाषा में बात करनी चाहिए भले ही बच्चा हिन्दी या अंग्रेजी में जवाब दे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है पर अगर माता पिता ही बच्चे से मातृ भाषा में बात नहीं करेंगे तो फिर दिक्कत होगी।
मन की नहीं विवेक और दिमांग से की सुने
संत सिद्ध भाऊ ने कहा कि मन हमेशा इंसान को गिराता है इसलिए विवेक और दिमाग के कहे अनुसार चलें। दिल, विवेक और दिमाग को हमेशा जागरूक रखे तथा सेवा के मार्ग को अपनाएं जो भी व्यक्ति सेवा के मार्ग पर चला है, उसकी सभी तकलीफें भगवान दूर कर देता है। उन्होंने नि:शुल्क यूरोलाजी शिविर का भी उल्लेख किया जहां पूरे मनोयोग से रोगियों की सेवा हो रही है।
पक्षियों को दें दान पानी
संत सिद्ध भाऊ ने गर्मी के इस मौसम में पशु पक्षियों के लिए दाने पानी की व्यवस्था पर भी जोर दिया और खासतौर अपने बच्चों से यह काम करवाने की बात कही। आपने कहा कि पशु पक्षियों के भीतर से निकलने वाले आशीर्वाद से हर विद्यार्थी पढ़ाई में निपुण होता है और उच्च पद को प्राप्त करता है।

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