शिक्षक ही समाज को दिशा दे सकता हैः सिद्धभाऊ

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– ‘अब और बहानेबाजी नहीं’ विषय पर विचार सत्र
हिरदाराम नगर। संत हिरदाराम गल्र्स काॅलेज में ’अब और बहानेबाजी नहीं‘ विषय पर विचार सत्र का आयोजन किया गया। संतजी के शिष्य सिद्धभाऊ ने शिक्षिकाओं से बात की और उनके अनुभवों को सुना।
उन्होंने कहा कि कहा कि हम यहां एकत्रित होकर परिचर्चा कर रहे हंै, जिससे कि एक-दूसरे के अनुभव को सुनकर लाभान्वित हो सकें। एक-दूसरे की गलतियों से सीखें। यदि व्यक्तित्व में जवाबदेही का गुण है तो निश्चय ही हर व्यक्ति सही कार्य करेगा। संदेहास्पद निर्णय लेने से बचें, किसी भी कार्य का निर्णय पूरे निश्चय के साथ लें। छात्रों को सीखने हेतु बार – बार अभ्यास करायें, क्योंकि कोई भी कला बिना अभ्यास के नहीं आती है। शारीरिक परिश्रम करेंगे तो भूख लगेगी और भूख लगने पर आनंद से खाया जाने वाला वह भोज्य पदार्थ स्वादिष्ट, सुपाच्य और स्वास्थ्य प्रदान करने वाला होगा।
माँ के नाम में ही चुम्बकीय आकर्षण होता है। माँ जो संस्कार बचपन में बच्चे के अंदर डालती है वह बच्चा उस संस्कार के साथ जीवन भर आनंद प्राप्त करता है। भाऊ ने कहा कि शिक्षक के ऊपर समाज की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। एक शिक्षक ही है जो समाज को नयी दिशा दे सकता है। वह छात्राओं में संवेदनशीलता एवं करूणा जगाकर उन्हंे संवेदनशील नागरिक बना सकता है। भाऊ ने कहा कि अपने भीतर की आवाज को सुनंे, फिर निर्णय लें। जो बात हमारे मन को छू जाये वह बात हमारे लिये ही है, यह उसको परखने की कसौटी है। साउन्ड आॅफ साइलेन्स के साथ बैठने का अभ्यास करें तो आत्मिक शांति का अनुभव होगा।
महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. चरनजीत कौर ने कहा कि स्वयं भी सफलता की ओर बढ़े और दूसरों को भी प्रेरित करेें। यदि हमारे जीवन में आनंद है तो इसका अर्थ यह है कि हम अपने कर्तव्यों के प्रप्रति जवाबदेह हंै। हमें अपनी सोच को सात्विक मोड़ देना है। अपने साथ – साथ दूसरों कीभावनाओं की भी कद्र करेें। भावनाएं ऐसी हांे जिसमें तर्क हो और तर्क ऐसा हो जिसमें भावना शामिल हो। कार्यक्रम में मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती विभा खरे द्वारा किया गया।

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