ज्ञान को सांझा कर दूसरों को सिखाने की मानसिकता से सीखें

share...Share on FacebookShare on Google+Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn

– संत कॉलेज मेंडॉ. एस. नीलकंठन का विशेष व्याख्यान सत्र का
हिरदाराम नगर।

संत हिरदाराम कन्या महाविद्यालय, संत हिरदाराम प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान महाविद्यालय एवं संत हिरदाराम प्रबंधन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक विषेष सत्र का आयोजन किया गया। इसके मुख्य वक्ता डॉ. एस. नीलकंठन अंतर्राष्ट्रीय परिवर्तनकारी प्रशिक्षक) थे।
इस सत्र का विषय ”सामाजिक नेटवर्किंग साइट्स का प्रभाव एवं उसके निवारक उपायÓÓ था। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष सिद्ध भाऊजी, कर्नल एन. पारवानी, विष्णु गेहानी वरिष्ठ शिक्षाविद्), तीनों संस्थाओं के प्रमुख डॉ. चरनजीत कौर, डॉ. राकेश आनन्द, डॉ. हिमांशु शर्मा, तीनों संस्थाओं के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे। डॉ. चरनजीत कौर ने स्वागत भाषण दिया।
सिद्धभाऊजी ने कहा कि आज इस आभासी जगत के इतने आकर्षण में हैं कि हमारी एकाग्रता को वह भंग कर रहा है। हम परम सत्ता का अंश हैं। कृतज्ञता एवं विनम्रता, एकाग्रता, धैर्य एवं सम्मानजनक व्यवहार करें। समाज में शिक्षित व्यक्ति का सम्मान होता है। विशेषकर छात्राओं के लिए शिक्षा जीवन पर्यंत उपयोगी एवं महत्वपूर्ण हैं। पतन के मार्ग से बचने के लिए चिंतन करें एवं समय के मूल्य को पहचानें।
डॉ. एस. नीलकंठन ने कहा कि जीवन में नवाचार लायें। यदि आप किसी भी चीज को प्रभावी ढंग से सीखना चाहते हैं तो उसे अपने मित्र के साथ सीखिये। ज्ञान को सभी के साथ सांझा कर दूसरों को सिखाने की मानसिकता से सीखें। यह हमार ज्ञान को अधिक सशक्त बनाता है। सम्प्रेषण हमारी जीवन रेखा है। हम 90 प्रतिशत स्वयंसे एवं 10 प्रतिशत अन्य व्यक्तियों से संवाद स्थापित करते हैं। स्व की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं से संवाद हमारे मानसिक स्वास्थ्य को समृद्ध करता है। स्व की अवधारणा का प्रभाव हमारे व्यक्तिगत, व्यवसायिक एवं समस्त रिश्तों पर होता है। 80 प्रतिशत कार्य हम बिना जागरूकता एवं समय की परवाह किये बगैर करते हैं। सोचकर सोचना जीवन की बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स एवं मोबाइल तकनीकी का चमत्कार हंै। दैनिक जीवन में हम इनके आदि हो चुके हैं, लेकिन यह हमारी समस्त संभावनाओं एवं क्षमताओं के सबसे बड़े शत्रु हैं। दूसरों पर दोषारोपण, क्रोध, एकाग्रता में कमी, अवसाद एवं रिश्तों में विकृति इसी के परिणाम हैं। इस अवसर पर उन्होंने छात्राओं के प्रश्नों का समाधान किया। संस्था द्वारा मुख्य अतिथि का शॉल एवं श्रीफ ल से सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं प्रमिता दुबे परमार ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *