सिंधु दर्शन यात्री : सिंधु की कलकल लहरें कभी नहीं भुलूंगा

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संतनगर । 03 जुलाई 2017 रवि कुमार
लौट आए सिंधु यात्री.. सिंधु नदी के कल-कल करते प्रभाव और सिंध की भावना को संजोकर लौटे है। देशभर के यात्रियों मेें शामिल भोपाल के नानक दासवानी ने सिंधु महोत्सव की यादों को सांझा किया है।
दासवानी का कहना है यात्रा के प्रारंभ से समापन तक सब कुछ यादगार रहा। पूरी यात्रा सिंधु है, सिंध है हमारा का भाव बना रहा। मैं भी उन 900 यात्रियों का हिस्सा था जिन्हें नदी में खड़े होकर सिंध की गौरवशाली परंपरा का अहसास हुआ। 24 जून को सिंधु भवन में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया जहां लगभग सिंधु दर्शन यात्री भारत से 900 लोग ने हिस्सा लिया। लेह लद्दाख के लोगों की भी मौजूद रही।
25 जून को सुबह सिंधु घाट पर यात्रियों ने मां सिंधु नदी पर मत्था टेका। उसके बाद वहां पर सिंधु दर्शन यात्रियों के लिए रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ी, पंजाबी, मणीपुरी, लदाखी एवं अनेक कलाकारो ने अपनी कलाओं की प्रस्तुति दी। सिंधी बहिराणा एवं सिंधी छेज ने भी सबका दिल जीत लिया। सिंधी बहिराणे की पूजा हुई। 26 जून को सुबह विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर सभी यात्रियों ने बर्फ का आनंद उठाया। शाम को स्थानीय ग्राउण्ड में पहुंचकर यात्रा की रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा समाप्ति हुई।

27 जून को यात्रियों की वापसी हुई, अपने साथ हर यात्री सिंधु नदी के प्रति अपनी आस्था और सिंध की गौरव गाथा का अपने साथ संजोकर लौटा।

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