सक्षम को करने दो अपनी दम पर सिंधु दर्शन

भोपाल 28 मई 2018

खरी-खरी
ठीक किया धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने जो सक्षम हैं वह अपनी दम पर सिंधु के दर्शन करने यात्रा कर सकते हैं, जो आयकर देकर देश के विकास में सहभागी बन रहे हैं, वह अपनी जड़ों से जुड़ी भावना को नमन करने सरकारी अनुदान पर कतई निर्भर नहीं हो सकते। सिंधु दर्शन यात्रा में सरकारी अनुदान उनके लिए है, जो मदद की दरकार रखते हैं। सिंधी सेंट्रल पंचायत की माने तो 90 फीसदी सिंधु समाज आयकरदाता है.. यह निश्चय ही गर्व की बात है, लेकिन पंचायत की आयकर दाता की शर्त हटाने की मांग यह सोचने को विवश करने वाली है, आपके पास भगवान झूलेलाल का दिया सब कुछ है तो सरकारी अनुदान क्यों ? महज 10 हजार रूपये के लिए सक्षम समाज को अपनी दम पर सिंधु दर्शन यात्रा के पवित्र संकल्प से कैसे महरूम किया जाता है। वैसे भी मेरा मानना है सिंधु समाज देने में मदद करता है, लेने में नहीं। अपने पुरूषार्थ और परमार्थ से उसने सिंधु से आने के बाद न केवल खुद को खड़ा किया है, बल्कि देश की अर्थ व्यवस्था में अपनी मौजूदगी को प्रमाणित किया है।
जिस संतनगरी से मानवसेवा की बात होती हो.. वहां की सामाजिक संस्था की सीएम से गुहार बेमानी है, उसके लेकिन, किंतु और परंतु जैसे तर्क समाज के सक्षम लोगों के कद को छोटा करने वाले हैं। उम्मीद है पंचायत समाज के सक्षम लोगों के सम्मान की कद्र करते हुए अपनी मांग वापस लेगा और जो सक्षम हैं उन्हें अपने दम सिंधु के दर्शन करने देगा। भले ही यह बात पंचायत के नुमाइंदों को नागवार गुजरे, लेकिन सिंधी समाज को जानने, समझाने वाले इसे जरूर सराहेंगे

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