कौम को बचाना है तो सिंधी भाषा और संस्कृति को जिन्दा रखें

 

  • सिंधी दिवस पर हुआ साधु वासवानी स्कूल में कार्यक्रम

हिरदाराम नगर।  10 अप्रैल 2018

साधु वासवानी स्कूल में बडे़ उत्साह एवं उमंग के साथ सिंधी भाषा दिवस मनाया गया।   कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान झुलेलाल ,भारत माता, मां सरस्वती व संतजी की मूर्ति पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया।शिक्षाविद्  विष्णु गेहानी ने अतिथियों का स्वागत किया एवं बताया कि हमें गर्व होना चाहिए कि हम सिंधी हैं लेकिन विडम्बना है कि आज अंग्रेजी भाषा हम पर हावी हो रही हैं  आज हम सिंधी दिवस पर यह संकल्प करे कि अंग्रेजी भाषा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देगे और अपनी मात् भाषा का सदैव उच्चारण करेगे।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंधी साहित्य अकादमी के निर्देशक कमल प्रेमचंदानी कहा कि हमे सिंधी भाषा को बचाने के लिए आज से ही शुरूआत करनी होगी और यह संकल्प लेना होगा कि जो बच्चे सिंधी नही है उन्हे हम सिंधी सिखायेगें सिधी हमारी प्राचीन व मीठी भाषा है अतः हमें अपनी भाषा का सदैव सम्मान करना चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साबूमल रीझवानी ने कहा कि 10.04.1967 को सिंधी भाषा को सविधान के आठवें षेड़यूल में मान्यता प्राप्त हुई। सिंधी भाषा हमारी माता है जिस प्रकार हम अपनी मां को नही भूल सकते उसी प्रकार अपनी सिंधी भाषा को भी हमे कभी नही भूलना चाहिये आज भी ऐसे कई व्यक्तित्व है जो सिंधी भाषा का सम्मान करते है और अपनी भाषा को बचाने के लिए प्रयासरत् है।कार्यक्रम में विषेष अतिथि के रूप मे  बंसत चेलानी, राजेश हिंगोरानी, वासदेव मोतियानी, तोलाराम हिमथानी पधारें जिन्होंने सभी को सिंधी भाषा दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह देष की बड़ी विडम्बना है कि सिंधी भाषा केवल किताबो में ही पढ़ने को मिलेगी देखा जाये तो सिधी ऐसा समूह है जो स्वावलंबन व सषक्त है लेकिन आज सभी बच्चे सिंधी भाषा को भूल चुके है ओैर हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा को अपना रहे है। अतः आज हम सिंधी दिवस पर यह संकल्प करे कि हम सिंधी भाषा को लिखने पढ़ने का प्रयास करेगें। और धर में भी सिंधी भाषा का ही उच्चारण करेगे। विद्यालय की छात्रा आयुषी व जिया गिदवानी ने बताया कि अगर मातृभाषा जिंदा है तो कौम भी जिंदा रहेगी आज सिंधी भाषा लुप्त होती जा रही है सिंधी भाषा हमारी संस्कृति व सभ्यता से जुड़ी हुई है अगर आज हमने अपनी मातृ भाषा को बचाने की कोषिष नही की तो हमारी भाषा का नाम और निषान मिट जायेगा। विद्यालय के बच्चों द्वारा सुन्दर कांड कि पक्तियां व एक सुन्दर गीत असां सिंधी आहियू प्रस्तुत किया गया। साथ ही इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम जहिखे झूलण जो मिलयो प्यार आ उहो हथ मथे करें व सिधी खेलो को भी प्रस्तुत किया गया।

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