Pitru Paksh 2018 : पितृपक्ष: पितरों को याद करे, शुभ कार्य वर्जित

Pitru Paksh 2018 

श्राद्ध महापर्व 24 सितंबर से शुरू होकर आठ अक्तूबर तक तक चलेगाँ चलेगा। आचार्य गुरूदेव तिवारी ने पित्रपक्ष को लेकर कई जानकारियां दी हैं। गुरूदेव के अनुसार पित्र पक्ष में शुभ कार्यों के लिए शुभ न माने जाते। 16 दिनों तक चलने वाले पितर पक्ष में पितर पृथ्वी पर आते हैं।

पितृपक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध में तिल और कुश की महत्ता विप्रधनेवः। आसारे दुर्ग संसारे षट्पदी मुक्तिदायनी।। मंत्र मंत्र में बताई गई है। … भगवान विष्णु कहते हैं कि तिल मेरे पसीने से और कुश मेरे शरीर के रोम से उत्पन्न हुए हैं। कुश का मूल ब्रह्मा, मध्य विष्णु और अग्रभाग शिव का जानना चाहिए। ये देव कुश में प्रतिष्ठित माने गए हैं। ब्राह्मण, मंत्र, कुश, अग्नि और तुलसी ये कभी बासी नहीं होते, इनका पूजा में बार-बार प्रयोग किया जा सकता है।
तुलसी, ब्राह्मण, गौ, विष्णु तथा एकादशी व्रत आदमी को परेशानियों से दूर करने के माध्यम हैं। विष्णु, एकदशी, गीता, तुलसी, ब्राह्मण और गौ ये मुक्ति प्रदान करने के साधन हैं। यही षट्पदी कहलाती है। श्राद्ध और तर्पण ये प्रधान हैं और पुरुषार्थ चतुष्टय को देने वाले हैं। तुलसी की गंध से पितृगण प्रसन्न हो कर अपने परिजन को आशीर्वाद देकर विष्णु लोक को चले जाते हैं। तुलसी से पिन्दर्चन करने से पितृ अनंतकाल तक तृप्त रहते हैं।

पितृपक्ष का दान
गाय, भूमि, तिल, सोना, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक इन दस वस्तुओं का दान महादान कहलाता है। जबकि तिल, लोहा, सोना, कपास, नमक, सप्त धान्य, भूमि और गौ ये अष्ट महादान कहे जाते हैं।
– धार्मिक तंत्र मंत्र

 

श्राद्ध की तिथियां

24 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध

25 सितंबर – प्रतिपदा श्राद्ध

26 सितंबर – द्वितीय श्राद्ध

27 सितंबर – तृतीय श्राद्ध

28 सितंबर – चतुर्थी श्राद्ध

29 सितंबर – पंचमी श्राद्ध

30 सितंबर – षष्ठी श्राद्ध

1 अक्टूबर – सप्तमी श्राद्ध

2 अक्टूबर – अष्टमी श्राद्ध

3 अक्टूबर – नवमी श्राद्ध

4 अक्टूबर – दशमी श्राद्ध

5 अक्टूबर – एकादशी श्राद्ध

6 अक्टूबर – द्वादशी श्राद्ध

7 अक्टूबर -त्रयोदशी श्राद्ध, चतुर्दशी श्राद्ध

8 अक्टूबर – सर्वपितृ अमावस्या

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