दिवाली 2018 : दिवाली पूजन करते समय जरूर रखें इन 10 बातों का ध्यान…

दिवाली 2018 में कब है व शुभ मुहूर्त क्या है |

Diwali Shubh Muhurat 2018

आज दिवाली है. आज के दिन मां लक्ष्‍मी जी और भगवान गणेश के पूजन की परंपरा है. कहा जाता है कि कार्तिक मास की अमावस्या की आधी रात में मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं. इसलिए उन्‍हें जो खुश कर लें उनके घर पूरे साल तक रहती हैं ऐसी मानता है. दिवाली हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है

दीवाली को दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, आपको बता दें कि दीवाली उत्सव धनतेरस (Dhantrayodashi 2018 : Monday, 5 November) से शुरू होता है और भैया दूज (Bhaiya Dooj  2018 : Friday, 9 November 2018) पर समाप्त होता है.

इस बार दिवाली पर पूजा का विशेष मुहूर्त है. अगर आप शुभ समयकाल में पूजा करते हैं तो आपको जरूर पूजा का फल मिलेगा.

Diwali 2018 : Laxmi Puja Shubh Muhurat

  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = 17:57 से 19: 53
  • अवधि = 1 घंटा 55 मिनट
  • प्रदोष काल = 17:27 से 20:06
  • वृषभ काल = 17:57 से 19:53 तक
shubh muhurat 2018

लग्न के अनुसार दिवाली सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

वृश्चिक लग्न

यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. वृश्चिक लग्न में मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज  एवं  राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार भी वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.

वृषभ लग्न

यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.

कुम्भ लग्न

यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. कुम्भ लग्न में वे लोग पूजा करते है, जो बीमार होते है, जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है.

सिंह लग्न

– यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.

पूजन की थाली में इन चीजों को जरुर शामिल करें

सभी गृहस्थ - कमल, श्वेत पुष्प को पूजा की थाली में जरूर रखें. 

किसान - पांच तरह के खाद्य पदार्थ का नैवेद्य  को पूजा की थाली में रखें.

व्यापारी -  कमलगट्‌टा की माला विद्यार्थी धर्मग्रंथ, अनार और तिल को पूजा की थाली में रखें.

पहले गणेश फिर लक्ष्मी और इसके बाद कुबेर की पूजा करें.

दीपावली पूजन सामग्री 

दीपावली पूजा की तैयारी : The Preparation of Diwali Worship

सबसे पहले चौकी पर लक्ष्मीजी व गणेशजी की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजा करने वाले मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे।

गणेश जी की आरती

कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण जी का प्रतीक है।

अब दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें औं दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अलावा एक दीपक गणेशजी के पास रखें।

मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचों बीच ॐ लिखें।

छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- ग्यारह दीपक, खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।
इन थालियों के सामने पूजा करने वाला बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।

चौकी पर ये सामान रखे

  1. लक्ष्मी
  2. गणेश
  3. मिट्टी के दो बड़े दीपक
  4. कलश, जिस पर नारियल रखें
  5. वरुण
  6. नवग्रह
  7. षोडशमातृकाएं
  8. कोई प्रतीक
  9. बहीखाता
  10. कलम और दवात
  11. नकदी की संदूकची
  12. थालियां, 1, 2, 3
  13. जल का पात्र

Ganesh Bhajan

Lakshmi Ji Aarti

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