इस गणेश चतुर्थी बना विशेष संयोग, शनिदेव हो रहें हैं मार्गी

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गणेश चतुर्थी को भगवान गणेशजी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन शुरू होता है ।

25 अगस्त को 58 वर्षों के बाद एक विशेष संयोग भी बन रहा है। जिसकी वजह से गणेश चतुर्थी और अधिक खास हो गई है। इस  दिन शनिदेव मार्गी हो रहे हैं

गणेश चतुर्थी के दिन नहीं करना चाहिए चांद का दर्शन,

एक बार गणेश जी को चंद्रलोक से भोज का आमंत्रण आया। गणेश जी को मोदक खाना बहुत पंसद होता है इसलिए उनका ध्यान मोदक पर ही था।

गणेश जी ने वहां जी भर कर मोदक खाए और वापस लौटते समय बहुत से मोदक साथ भी ले आए। मोदक बहुत ज्यादा थे, जो उनसे संभाले नहीं गए। उनके हाथ से मोदक गिर गए, जिसे देखकर चंद्र देव अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

चंद्रदेव को हंसता देख गणेश जी गुस्से में आ गए । क्रोध में आकर गणेश जी ने चंद्रदेव को श्राप दे दिया कि जो भी उन्हें देखेगा उस पर चोरी का कलंक लग जाएगा। साथ ही चंद्रमा को श्राप दे दिया कि आज से तुम काले हो जाओगे।

तब से ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन जो भी कोई चांद के दर्शन करेगा उस पर झूठा आरोप लगेगा। इसलिए भादों महीने की शुक्ल चतुर्थी को चांद के दर्शन नहीं करना चाहिए।

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