होली खास: जलती चितांओं और मुर्दों के बीच खेली होली

चिताओं की राख से होली खेल कर निभाई भोले बाबा की परंपरा
महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं और मुर्दों के बीच भस्म से होली खेलने की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। यहां रंग भरी एकादशी के ठीक एक दिन ये परंपरा एक बार फिर निभाई गई। बाबा विश्वनाथ के साथ होली खेलने की परंपरा है।
मशान नाथ मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि महादेव शिवरात्रि के दिन मां पार्वती संग विवाह के बाद रंग भरी एकादशी को गौना कर उनको काशी लेकर आए थे। इसके एक दिन बाद शिव भक्त अपने बाबा विश्वनाथ के साथ होली खेलते रहे हैं।
इस दिन महादेव अपने प्रिय गणए भूत.प्रेत, पिसाच, दृश्य और अदृश्य शक्तियों के साथ महाश्मशान पर चिता भस्म की होली खेलते हैं। काशी ही एक मात्र ऐसी जगह हैए जहां मौत को भी मंगल माना जाता है। स्थानीय लोगों के साथ.साथ विदेशी पर्यटकों ने भी भस्म होली खेली। इस दौरान ढोल- मृदंग बजाते हुए भक्तों ने फगुआ गाने भी गाए।
काशी विश्वनाथ का श्रृंगार भी भस्म से ही किया जाता है। माना जाता है कि महादेव अपनी नगरी में जिसको तारक मन्त्र देकर मुक्ति देते हैंए फिर उसी की चिता के भस्म से होली का उत्सव मनाते हैं।

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