महाशिवरात्रि पर दिन और रात में रखें व्रत हर बाधाएं होंगी दूर

– प्रलय की बेला में तांडव करते अवतरित हुए… भोले बाबा
आचार्य देवेन्द्र आनंद
महाशिवरात्रि में भोले बाबा की आराधना करने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर का रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था।
प्रलय की बेला में इसी दिन भगवान शिव ने तांडव करते हुए ब्राह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर दिया था, इसलिए महाशिवरात्रि को कालरात्रि भी कहा जाता है।
शिव की महिमा को शिवसागर में व्याख्यायित किया गया है। शिवसागर में बताया गया है कि विविध शक्तियां, विष्णु व ब्रह्मा, जिसके कारण देवी और देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं, ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को प्रणाम है।
महाशिवरात्रि शिव भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर बेल-पत्र आदि चढ़ाकर पूजन करते हैं…. उपवास तथा रात को जागरण करते हैं। शिवलिंग पर बेल-पत्र चढ़ाना, उपवास तथा रात्रि जागरण करना एक विशेष कर्म की ओर इशारा करता है। माना जाता है कि इस दिन शिव का विवाह हुआ था, इसलिए रात्रि में शिवजी की बारात निकाली जाती है। शिवरात्रि का पर्व परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है। इस व्रत के विधान में सबेरे स्नानादि के बाद व्रत रखा जाता है। शिवरात्रि पर जागरण का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा है कि माता पार्वतीजी ने भगवान शिवशंकर से पूछा- ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। शिवजी ने पार्वती को शिवरात्रि के व्रत का उपाय बताया।
हर माह आती है शिवरात्रि
शिवरात्रि हर माह में आती है…. परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव भी इस समय तक उत्तरायण में आ चुके होते हैं तथा ऋतु परिवर्तन का यह समय अत्यन्त शुभ कहा गया है. शिव का अर्थ है कल्याण. शिव सबका कल्याण करने वाले हैं. अतरू महाशिवरात्रि पर सरल उपाय करने से ही इच्छित सुख मिलता है। ज्योतिषीय गणित के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चंद्रमा अपनी क्षीणस्थ अवस्था में पहुंच जाते हैं, जिस कारण बलहीन चंद्रमा सृष्टि को ऊर्जा देने में असमर्थ हो जाते हैं. चंद्रमा का सीधा संबंध मन से कहा गया है. अब मन कमजोर होने पर भौतिक संताप प्राणी को घेर लेते हैं तथा विषाद की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे कष्टों का सामना करना पड़ता है। चंद्रमा शिव के मस्तक पर है, इसलिए चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शिव पूजा का विधान है।
कैसे करें शिवजी की पूजा…
– सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें।
– घर के आस-पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जा सकता है।
– शिवपुराण का पाठ सुने। रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ करें।
– शिव रात्रि के दूसरे दिन सुबह सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त करें।
– महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा का विधान है। चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं।
– चार पहर रात्रि में वेदमंत्र संहिता, रुद्राष्टा ध्यायी पाठ ब्राह्मणों के मुख से सुनना चाहिए।
– सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजन-आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए। सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन करें।
व्रत से मिलता है फल…
– शिव की उपासना और व्रत रखने से व्यवसाय में वृद्धि और नौकरी में तरक्की मिलती है।
– शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग का गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करने ओम नमः शिवाय का जाप करने से सभी बाधाओं का शमन होता है।
– बीमारी से परेशान होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से ही करें। मंत्र दिखने में जरूर छोटा दिखाई देता है, किन्तु प्रभाव में अत्यंत चमत्कारी है.
– शिवरात्रि के दिन एक मुखी रुद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवाकर धूप-दीप दिखा कर तख्ते पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर स्थापित करें।

महाशिवरात्रि पर ये करें भोजन
– पर्व पर भगवान शंकर पर चढ़ाया गया नैवेद्य खाना निषिद्ध है, जो इस नैवेद्य को खाता है, वह नरक के दुखों का भोग करता है। इस कष्ट के निवारण के लिए शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम की मूर्ति का रहना अनिवार्य है। यदि शिव की मूर्ति के पास शालीग्राम हो, तो नैवेद्य खाने का कोई दोष नहीं है.

– व्रत के व्यंजनों में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं और लाल मिर्च की जगह काली मिर्च का प्रयोग करते हैं. कुछ लोग व्रत में मूंगफली का उपयोग भी नहीं करते हैं. ऐसी स्थिति में आप मूंगफली को सामग्री में से हटा सकते हैं। व्रत में यदि कुछ नमकीन खाने की इच्छा हो, तो आप सिंघाड़े या कुट्टू के आटे के पकौड़े बना सकते हैं.।

 

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