देश के नव-निर्माण में विद्यार्थी अपना पूरा योगदान दें – राज्यपाल

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अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री ओ.पी. कोहली ने विद्यार्थियों से कहा है कि देश के नव-निर्माण में अपना पूरा योगदान करें, तभी उच्च शिक्षा के उद्देश्य में सफल होंगे। श्री कोहली अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। श्री कोहली ने समारोह में मुख्य न्यायाधिपति, गुवाहाटी हाईकोर्ट श्री अजीत सिंह, शास्त्रीय गायक पं. छन्नूलाल मिश्र, अध्यक्ष इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला-केन्द्र श्री रामबहादुर राय और राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग श्री नंदकुमार साय को मानद उपाधि से सम्मानित किया। साथ ही, विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को स्वर्ण-पदक एवं उपाधियाँ प्रदान कीं।

राज्यपाल श्री कोहली ने कहा कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिये गौरवपूर्ण प्रसंग होता है। इसका नियमित आयोजन होना चाहिए। विश्वविद्यालय तभी पूर्ण माने जायेंगे, जब नवीन ज्ञान का सृजन होने के साथ ही सृजित ज्ञान आने वाली पीढ़ी को देने का कार्य किया जाये। उन्होंने अपेक्षा की कि प्रदेश के विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में अपना नाम स्थापित करेंगे। इससे अन्य देशों के छात्र भी भारतीय शिक्षा संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने के लिये आकर्षित होंगे।

राज्यपाल ने कहा कि छात्रों में सृजनशीलता और संवेदनशीलता होना चाहिए ताकि वे नवाचार कर समाज में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि छात्रों के साथ शैक्षणिक कार्य के अतिरिक्त भी संवाद एवं समन्वय बनायें। शिक्षा को परंपरा एवं आधुनिकता से जोड़ने पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि इससे हम भारतीयता से जुड़ेंगे और विकास के नित नये आयाम प्राप्त करने में सफलता मिलेगी। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण आत्म-विश्वास है। इसलिए गुरूजनों तथा विद्यार्थियों को इस दिशा में विचार करते हुए देश के उत्थान में युवाओं की क्षमता का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को रोजगार सुलभ कराने के लिये शिक्षा पाठ्यक्रम में कौशल विकास को शामिल कर बाजार और रोजगार के साथ समन्वय बनाना होगा।

दीक्षांत समारोह में उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने विवेकानंद द्वारा गुरू की महत्ता के संबंध में दिये गये उद्गार की चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा में नैतिक मूल्यों का समावेश जरूरी है। शिक्षा का सदुपयोग परमार्थ के लिये होना चाहिये। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि सज्जनता की सुगंध से समाज को सुवासित करें।

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