सीबीआई चीफ आलोक वर्मा की छुट्‌टी

नई दिल्ली.10 जनवरी 2019

सीबीआई चीफ आलोक वर्मा की छुट्‌टी हो गई है। तीन सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति की दो घंटे चली बेठक के बाद दो-एक के आधार पर वर्मा को हटाने का निर्णय लिया गया। 55 साल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब रिश्वतखोरी और कर्तव्य निवर्हन में लापरवाही के आरोपों के आधार सीबीआई चीफ को हटाया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार चयन समिति ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को हटा दिया। मोदी और समिति के दूसरे सदस्य सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी वर्मा को हटाए जाने के पक्ष में थे। वहीं, समिति के तीसरे सदस्य और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सीबीआई चीफ को हटाए जाने के खिलाफ थे। खड़गे ने समिति को अपना विरोध पत्र भी सौंपा। यहां यह बताना जरूरी है सीबीआई चीफ के नियुक्ति के समय आलोक वर्मा का खड़गे ने विरोध किया था, आज हटाए जाने का विरोध किया। वर्मा का कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा था। 1979 की बैच के आईपीएस अफसर वर्मा को अब सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होम गार्ड विभाग का महानिदेशक बनाया गया है। वहीं, नागेश्वर राव दोबारा सीबीआई चीफ बन गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था फैसला करने को
वर्मा और जांच एजेंसी में नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद के बाद केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। इस फैसले के खिलाफ वर्मा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 76 दिन बाद बहाल तो कर दिया था, लेकिन उन्हें नीतिगत फैसले लेने से रोक दिया था। साथ ही कहा था कि उच्चाधिकार चयन समिति ही वर्मा पर लगे आरोपों के बारे में फैसला करेगी।

 

सीबीआई निदेशक को यही समिति चुनती है 
सीबीआई निदेशक का चयन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति करती है। चीफ जस्टिस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष इसके सदस्य होते हैं। अगर इनमें से कोई सदस्य बैठक में शामिल नहीं होता है तो फैसला अगली बैठक तक टाल दिया जाता है। समिति की पहली बैठक बुधवार को हुई थी। लेकिन सीवीसी की तरफ से कागजात नहीं मिलने पर फैसला टाल दिया गया था। गुरुवार को इस समिति की दूसरी बैठक हुई जो दो घंटे चली।

मीडिया रिपोर्ट

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