फैसला.. ताउम्र काटेगा जेल में आसाराम

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  • पहले हंसा फिर राम.. राम.. राम करने लगा, घुटनों के बल  बैठकर रोया
  • पुलिस वाले से बाेला- अब जेल में ही रहेंगे और मौज करेंगे

नई दिल्ली। 25 अप्रैल 2018

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 2013 से जोधपुर जेल में बंद आसाराम को अदालत ने दोषी करार दिया है। जज ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। आसाराम को मरने तक जेल में ही रहना होगा, वहीं 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनने के बाद आसाराम हंसे… फिर राम.. राम.. राम.. करने लगा और घुटनों पर बैठकर रोने लगा।

मीडिया रिपोर्ट के अुनसार धारा 376 (4) के तहत 1 लाख का जुर्माना, आईपीसी की धारा 73 डी के तहत उम्रकैद, आईपीसी की धारा 376 (2)एफ के तहत आजीवन कारावास, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत 6 महीने, और धारा 506 के तहत एक साल की सजा सुनाई है। दो अन्य दोषियों शरत और शिल्पी को 20-20 साल की सजा सुनाई है। सजा के ऐलान के बाद जज मधुसूदन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है वहीं केस से जुड़े अन्य लोगों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

सजा सुनाने के बाद कुछ देर रोककर आसाराम ने वहां खड़े पुलिस वाले से कहा कि अब जेल में ही रहेंगे और मौज करेंगे। इस बीच पीड़िता के वकील ने कोर्ट में पीड़िता को 1 करोड़ का मुआवजा दिए जाने की मांग वाली याचिका लगाई है। वहीं आसाराम की तरफ से गुरुवार को हाईकोर्ट में इस सजा को सस्पेंड करने के लिए अपील की जाएगी।

पहले केस में दोषी ठहराए जाने के बाद आसाराम सिर पकड़कर बैठ गया और राम नाम जपने लगा। इस बीच जेल परिसर में एंबुलेस जाते हुए देखी गई जिसके बाद कहा जा रहा था कि आसाराम की तबीयत बिगड़ गई है। हालांकि, कुछ देर बाद सूचना आई कि आसाराम की तबीयत ठीक है। इस बीच आसाराम के कुछ समर्थक जेल के बाहर पहुंचकर हंगामा करने लगे जिन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।

आसाराम पर पॉक्सो और अजा-जजा एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं। केस में दोषी ठहराए जाने के बाद आसाराम को 10 साल से उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि आसाराम को किन धाराओं में दोषी करार दिया गया है।

फैसले के बाद आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने कहा कि हम अपनी लीगल टीम से चर्चा करेंगे और भविष्य के प्लान पर फैसला लेंगे। हमें न्याय व्यवस्था में भरोसा है।

इससे पहले सुबह 8 बजे जोधपुर कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा, वकील व अन्य अधिकारी सेंट्रल जेल पहुंचें और सजा पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई जेल में बैरक नंबर दो के पास बने बैरक में हुई।

 

 

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