अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेंगे नरेन्द्र मोदी

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नई दिल्ली ़18 मार्च 2018
चार  साल से सरकार चला रहे  नरेन्द्र मोदी की पहली परीक्षा की घड़ी है। सोमवार को टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा। वाईएसआर कांग्रेस के वाईवी सुब्बा रेड्डी ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए उनके नोटिस को सोमवार की कार्यवाहियों में लिस्ट करने के लिए लोकसभा सचिवालय को लिखा है। टीडीपी ने भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दे रखा है।

इससे पहले शुक्रवार को इन दोनों पार्टियों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं हो सका था। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने तर्क दिया था कि सदन नें अव्यवस्था की स्थिति में अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज किया था। दरअसल शुक्रवार को टीआरएस, एआईएडीएमके समेत अन्य पार्टियां कई मुद्दों पर सदन के वेल में आकर हंगामा कर रहे थे। ऐसे में सोमवार को सदन व्यवस्थित रहेगा या नहीं, इसमें अब भी संदेह है।

वाईएसआर कांग्रेस ने सबसे पहले केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। दरअसल केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने से इनकार कर दिया इसके बाद सूबे में विपक्ष की भूमिका निभा रही वाईएसआर कांग्रेस ने यह कदम उठाया। वाईएसआर कांग्रेस से प्रतिद्वंद्विता और आंध्र से जुड़ा मसला होने की वजह से टीडीपी भी उसी रास्ते पर चली और चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए से अपनी दोस्ती तोड़ने का ऐलान कर दिया।

इसके बाद टीडीपी ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। अब दोनों पार्टियां दूसरे विपक्षी दलों से भी अविश्वास प्रस्ताव पर समर्थन लेने में जुटी हुईं हैं। दरअसल अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन हासिल होना चाहिए। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, एसपी के अलावा लेफ्ट पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। हालांकि केंद्र सरकार को पूरा भरोसा है कि वह बहुमत साबित कर लेगी।

वर्तमान स्थिति में लोकसभा की स्ट्रेंथ 539 सदस्यों की है। ऐसी स्थिति में बहुमत साबित करने के लिए 270 सांसदों की जरूरत है। अकेले बीजेपी के पास 274 सांसद हैं। इसके अलावा बीजेपी को अन्य सहयोगियों का समर्थन भी है। हालांकि टीडीपी के 16 सांसदों का साथ छूटने से एनडीए के संख्याबल में कमी जरूर आई है।

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