पूर्वाेत्तर: 25 साल पुराना वाम का गढ़ ढहा

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त्रिपुरा में कमल खिला, नागलैंड में कामयाबी

चुनाव डेस्क 03 मार्च 2018
पूर्वाेत्तर में बीजेपी को शानदार कामयाबी मिली है। नॉर्थ ईस्ट के तीन राज्यों के नतीजे आ गए हैं, त्रिपुरा में भाजपा-इंडीजनस पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफटी) गठबंधन ने 25 साल से लगातार चले आ रहे वाम शासन को उखाड़ फेंका है। नागालैंड में भी बीजेपी को खासी कामयाबी मिली है। मेघालय में बीजेपी खाता जरूर खोला है लेकिन उसके विधायक ज्यादा नहीं है।
– त्रिपुरा में सीपीएम की 25 साल पुरानी सरकार के खिलाफ एंटी एनकंबेंसी फैक्टर चरम पर था। लेफ्ट सीएम माणिक सरकार को भले ही गरीबों का सीएम होने का तमगा हासिल था, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक निचले स्तर पर वह करप्शन रोकने में नाकाम रहे। इसलिए सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी थी। लोगों का ये गुस्सा बीजेपी के पक्ष में काम कर गया।
त्रिपुरा में बीजेपी ने आईपीएफटी के साथ गठबंधन कर जीत के समीकरण पर मुहर लगा दिया। इस गठबंधन की वजह से बीजेपी को त्रिपुरा में आदिवासियों तक पहुंचने में कामयाबी मिली। आदिवासियों की जनसंख्या त्रिपुरा में 31 फीसदी है। बीजेपी ने यहां की जनता को रोजगार का सपना दिखाया दिया। जबकि यहां पर वामपंथी सरकार नौकरी के मुद्दे को एड्रेस करने में फेल रही थी। बीजेपी ने आदिवासियों के लिए, बांस आधारित विशेष आर्थिक जोन, टेक्सटाइल्स, फूड प्रोसेसिंग जैसे यूनिट लगाने का वादा किया। इसके अलावा बीजेपी ने इन राज्यों के लिए ऑटोनामस स्टेट काउंसिल गठन करने का वादा किया। इस काउंसिल को केन्द्र से मिले फंड तक पहुंच होगी।
– कांग्रेस पूर्वोत्तर के राज्यों में लगातार पिछड़ती रही, कमजोर होती गई। बीजेपी ने इसका फायदा उठाया। इन राज्यों में कांग्रेस के चुनाव जीतने में सक्षम कई नेता बीजेपी में आ गये, कांग्रेस के पास यहां कोई कद्दावर चेहरा नहीं बचा। कांग्रेस मेघालय में 2003 से शासन कर रही है, पार्टी ने इसका इस्तेमाल अपना जनाधार मजबूत करने में नहीं किया। कांग्रेस मतदाताओं के मिजाज को गंभीरता पूर्वक नहीं ले सकी। नागालैंड में कांग्रेस में लगातार टूट से पार्टी कमजोर हुई।

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