शपथ पहले ली थी इसलिए बने दीपक सीजेए

नई दिल्ली 13 जनवरी 2018
वरिष्ठता क्रम न्यायपालिका में भी खासा मायने रखता है। हाई कोर्ट के जजों के लिए यह बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसके आधार पर ही उनके कॅरियर में भविष्य की संभावनाएं तय होती हैं। इस पर ही उनके हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने और यहां तक कि देश के मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी मिलने की संभावनाएं तय होती हैं। हालांकि इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं, जब हाई कोर्ट के जजों को बिना चीफ जस्टिस बने ही सुप्रीम कोर्ट भेज दिया गया, इसके बाद भी वरिष्ठता के सिद्धांत का यथासंभव पालन किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में किसी भी जज की वरिष्ठता उसके शपथ लेने के समय से तय होती है। यदि एक ही दिन कई जज शपथ लेते हैं तो जो पहले शपथ ग्रहण करता है, वह सीनियर माना जाता है। चीफ जस्टिस के खिलाफ विद्रोह करने वाले चार जजों में शामिल जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर को सुप्रीम कोर्ट भेजने में देरी की गई और यही वजह है कि उनके हाथ से चीफ जस्टिस बनने का मौका छिन गया।
23 जूनए 1997 को जस्टिस चेलामेश्वर को हाई कोर्ट का जज नियुक्ति किया गया था। उनसे पहले सीजेआई दीपक मिश्रा को 17 जनवरी, 1996 को हाई कोर्ट जज बनाया गया था, जबकि खेहर को 8 फरवरी, 1999 को नियुक्ति मिली थी। लेकिन, जस्टिस चेलामेश्वर 3 मई, 2007 को ही गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस हो गए। वहीं चेलामेश्वर के काफी बाद में खेहर, 29 नवंबर, 2009 और जस्टिस मिश्रा, 23 दिसंबर 2009 को चीफ जस्टिस बने थे।
बाद में जस्टिस चेलामेश्वर को मिली इस वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए तत्कालीन कलीजियम ने जस्टिस खेहर को 13 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट भेज दिया था। इसके करीब एक महीने बाद ही जस्टिस मिश्रा और चेलामेश्वर को 10 अक्टूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया। जस्टिस चेलामेश्वर से पहले दीपक मिश्रा ने शपथ ली, जिसके चलते उन्हें वरिष्ठता हासिल हुई।
यदि वरिष्ठता क्रम को ध्यान में रखा गया होता तो जस्टिस चेलामेश्वर सीजेआई टीएस ठाकुर के रिटायरमेंट के बाद 4 जनवरी, 2017 को चीफ जस्टिस बन गए होते। ऐसा होता तो खेहर के स्थान पर वही चीफ जस्टिस होते, जिनके बाद 28 अगस्तए 2017 को दीपक मिश्रा ने शपथ ली थी।

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