तलाक अब राज्यसभा की दहलीज पर

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नई दिल्ली 01 जनवरी
एक साथ तीन तलाक को अपराध ठहराने वाला विधेयक मंगलवार को राज्यसभा में पेश होगा। इससे पहले पिछले सप्ताह इस विधेयक को लोकसभा से मंजूरी दी जा चुकी है। इस विधेयक में एक साथ तीन तलाक का दोषी पाए जाने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। मुस्लिम महिला (शादी के अधिकार का संरक्षण) बिल को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की ओर से 2 जनवरी के लिए लिस्टेड कराया गया है।
इस विधेयक में तीन तलाक की पीड़ित महिला को जीवन निर्वाह करने के लिए मदद की मांग हेतु मजिस्ट्रेट के पास जाने का अधिकार दिया गया है। यही नहीं महिला अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी की भी मांग कर सकती है। विधेयक के अनुसार मौखिक, लिखित, वॉट्सऐप, मेसेज या किसी भी माध्यम से दिए गए एक साथ तीन तलाक को अवैध माना जाएगा।

हालांकि केरल के राजनीतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का दावा है कि यदि यह बिल राज्यसभा से भी पास होता है तो देश के कई मुस्लिम संगठन सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। लोकसभा में सरकार ने भले ही इस विधेयक को आसानी से पास करा लिया था, लेकिन राज्यसभा में इसे पारित करना आसान नहीं होगा। उच्च सदन में सत्ताधारी दल बीजेपी के पास बहुमत नहीं है। ऐसे में सरकार को बिल को राज्यसभा से पारित कराने के लिए विपक्षी दलों पर निर्भर रहना होगा।

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