लोकतंत्र में सबसे ऊपर जनता है_बंगाल सरकार

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 कोलकाता
मुहर्रम के बाद दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को हाई कोर्ट की ओर से खारिज किए जाने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने इमर्जेंसी मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में सभी सीनियर अफसर-चीफ सेक्रटरी मलय रॉय, होम सेक्रटरी अत्री भट्टाचार्य, डीजीपी सुरजीत पुरकायस्थ, कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के अलावा सभी एसपी और मंत्री शामिल होंगे। कोर्ट के आदेश के बाद ताजा हालात की समीक्षा करने के मकसद से ये सभी बैठक में हिस्सा लेंगे।

ममता बनर्जी ने  कई स्थानों पर दुर्गा पूजा कार्यक्रम का उद्घाटन किया। हालांकि, इस दौरान उन्होंने कोर्ट के आदेश पर एक भी सीधी टिप्पणी नहीं की। हालांकि, उन्होंने कहा कि मूर्तियां कब विसर्जित करनी हैं, इस मामले में आखिरी फैसला लोगों का ही होगा। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में सबसे ऊपर जनता है। उनका फैसला सबसे बड़ा होता है।’ 1 अक्टूबर को मुहर्रम के बाद मूर्ति विजर्सन के सरकारी फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने वालों पर तंज कसते हुए सीएम ने कहा, ‘मैं सुब्रत (सुब्रत मुखर्जी) से पूछना चाहूंगी कि क्या शनिवार या एकादशी को मूर्ति विसर्जन की प्रथा है?’ बता दें कि इस साल विजयदशमी शनिवार को है जबकि एकादशी मुहर्रम के दिन पड़ रही है।

ममता ने यह सवाल एकडालिया एवरग्रीन स्थित पूजा पंडाल का उद्घाटन करते हुए सीनियर कैबिनेट मंत्री मुखर्जी से किया। मुखर्जी ने जब ममता के समर्थन में सिर हिलाया तो सीएम ने कहा, ‘तो समस्या कहां है? कुछ लोग त्योहार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। वे शांति भंग की कोशिश कर रहे हैं।’ ममता ने सीधे तौर पर उन लोगों को निशाने पर लिया जिन्होंने राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हालांकि, ममता ने खुद को सिर्फ दलीलों तक सीमित नहीं किया। उन्होंने जनभावनाओं का ध्यान रखते हुए बिना देखे चंडी पाठ किया। माना जा रहा है कि इसका मकसद दक्षिणपंथी संगठनों को यह दिखाना था कि वह किसी से कम हिंदू नहीं हैं। ममता को लगता है कि ऐसे संगठन बंगाली लोगों के दिमाग में उनकी ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ करने वाली की छवि बना रहे हैं।

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