रोहिंग्या संकट_अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव से फर्क नहीं पड़ता

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यंगून19 sep 2017

म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची ने  पहली बार रोहिंग्या संकट पर चुप्पी तोड़ी। सू ची ने अपने संबोधन में कहा कि वह जानती हैं कि पूरी दुनिया की नजरें फिलहाल रखाइन राज्य में जारी हिंसा के बाद रोहिंग्या मुस्लिमों के पलायन पर टिकी हुई हैं। लेकिन उन्होंने इस हिंसा के लिए पिछले साल भर में रोहिंग्या चरमपंथियों की तरफ से हो रहे हमलों को भी जिम्मेदार बताया।

सू ची ने यह भी साफ किया कि उन्हें लगातार बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव से फर्क नहीं पड़ता, वह राज्य की स्थिति को सुधारने के लिए एक स्थायी समाधान खोजने को प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, सू ची ने देश के नाम अपने संबोधन में उन बेगुनाह लोगों के प्रति दुख जताया, जिन्हें अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। अपने संबोधन में सू ची ने कहा कि मुस्लिम चरमपंथी समूहों ने पुलिस चौकियों को अपना निशाना बनाया जिसके बाद भड़की हिंसा में लोगों के घर तक जला दिए गए। उन्होंने कहा कि ताजा हिंसा 25 अगस्त को भड़की जब पुलिस चौकी पर चरमपंथी रोहिंग्याओं ने हमले किए। इसलिए सरकार ने अराकन रोहिंग्या सैलवेशन आर्मी को आतंकी समूह घोषित कर दिया।

सूची ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि म्यांमार एक ऐसा देश बने जो धर्म और जाति के आधार पर बंटे। जो लोग वापस आना चाहते हैं उनके लिए म्यांमार रेफ्यूजी वैरिफिकेशन प्रॉसेस शुरू करने के लिए तैयार है। हमें यह देखना होगा कि आखिर यह पलायन क्यों हो रहा है। मैं उन लोगों से बात करना चाहूंगी जो रखाइन छोड़कर बांग्लादेश भागे हैं।’ सू ची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि म्यांमार को पूरे देश के तौर पर देखें, न कि उसे सिर्फ एक छोटे हिंसाग्रस्त इलाके के आधार पर आंके।

सू ची ने कहा कि सेना को यह निर्देश दिए गए हैं कि रखाइन राज्य में जारी कार्रवाई के दौरान किसी भी आम नागरिक को कम से कम नुकसान पहुंचे। उन्हें सख्त तौर पर नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा के बाद सभी मुस्लिम गांव खाली नहीं हुए हैं, अभी भी इन गांवों में मुस्लिम रह रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों से इन गांवों का दौरा करने के लिए भी आमंत्रित किया।

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