मोदी के मंत्रियों के इस्तीफे.. शाह-मोदी ने की मंत्रणा

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नई दिल्ली 01 sep 2017
मोदी मंत्रिपरिषद में जल्द ही बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ मंत्रियों ने गुरुवार को इस्तीफा दिया था। इस्तीफे की वजह मंत्रियों की परफॉर्मेंस को लेकर बीजेपी आलाकमान की नाराजगी बताई जा रही है। हालांकि, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कैबिनेट बदलाव के पीछे का सबसे बड़ा मकसद मिशन 2019 ही है क्योंकि अब सरकार के कार्यकाल में 2 साल से भी कम का वक्त बचा है। इससे पहले, सरकार उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है जहां जल्द या अगले साल चुनाव होने वाले हैं।
इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में शामिल राजीव प्रताप रूडी ने शुक्रवार को कहा कि वह पार्टी के कार्यकर्ता हैं और कहीं भी अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं। वहीं, संजीव बालयान ने भी पुष्टि की कि पार्टी की ओर से उनका इस्तीफा मांगा गया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों की विदाई का आधार परफॉर्मेंस है। बालयान और रूडी को अब क्या रोल मिलेगा, इसका जवाब तो निकट भविष्य में ही मिलेगा, लेकिन जिन लोगों को मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं, उनके रोल मोदी और शाह की जोड़ी ने पहले से तय कर रखे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बदलाव का मकसद 2019 चुनाव से पहले पार्टी का विभिन्न राज्यों में जनाधार और मजबूत करना है। मंत्री पद सिर्फ परफॉर्मेंस के आधार पर खाली नहीं हुए हैं। कुछ मंत्रियों ने खुद से पेशकश की है, वहीं कुछ पर अतिरिक्त मंत्रालयों का दबाव है।

उमा भारती ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ना चाहा है। वहीं, रेल दुर्घटनाओं की वजह से आलोचना के शिकार सुरेश प्रभु ने सार्वजनिक तौर पर इस्तीफे की पेशकश की थी। गुरुवार को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाए गए महेंद्र नाथ पांडेय और पंजाब बीजेपी अध्यक्ष विजय सांपला को ‘संगठन या सरकार में किसी एक ही जगह पद लेने’ के नियम के तहत जगह खाली करनी होगी। वहीं, कई मंत्रालयों के बोझ तले दबे नेताओं की बात करें तो अरुण जेटली के पास वित्त और रक्षा मंत्रालय हैं। वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी नरेन्द्र सिंह तोमर के पास है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति इरानी के पास तो हर्षवर्धन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अलावा पर्यावरण मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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