सवर्ण आरक्षण पर 90 प्रतिशत हुई हां, 10 फीसदी न

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बीडीसी न्यूज को एक हजार विजिटर्स ने दी थी अपनी राय

सर्वे में दी थी अपनी राय, केन्द्र का मास्टर स्ट्राक
भोपाल। 10 जनवरी 2019
सवर्णों का सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए 10 प्रतिशत रिजर्वेशन को लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी हरी झंडी मिल गई है। यह मोदी सरकार के चुनाव के अंतिम दिनों में बिल को सवर्णों का मानने का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।
लोकसभा और राज्यसभा में सियासी कसौटी पर केन्द्र सरकार के सवर्णों को दस प्रतिशत रिजर्वेशन के प्रस्ताव कसा रहा था, तभी बीडीसी न्यूज ने अपने विजिटर्स के बीच हां और न में सर्वें किया था। सर्वे के परिणामों ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि लोकसभा चुनाव के चलते सियासी दल भले ही विरोध करें, लेकिन प्रस्ताव पास होगा। एक हजार विजिटर्स की राय हमें, मिली जिसमें 900 ने केन्द्र के फैसले को सही ठहराया था, 100 ने लोगों ने गलत बताया था।
आर्थिक रूप से कमजोर का मापदंड अभी बहस का मुद‌्दा है, लोगों का कहना है कि आठ लाख की आबादी, पांच एकड़ जमीन, मकान होने पर भी गरीब माने जाने से देश की 90 फीसदी से अधिक आबादी इस दायरे में आ जाएगी। यह केवल सवर्णो को मनाने के लिए किया है। एट्रोसिटी एक्ट और सवर्णों की नाराजगी का खामियाजा मध्यप्रदेश में भाजपा को भुगतना पड़ा है। राजस्थान में भले ही हर पांच साल में सत्ता परिर्वतन होता हो, लेकिन वोटों पर असर पड़ा है। लोकसभा चुनाव सवर्ण 164 सीटों पर निर्णायक भूमिका में है। श्रीराम मंदिर निर्माण का मुद‌्दा का फैसला होना संभव नहीं है, क्योंकि मामले की नए सिरे से सुनवाई जो हो रही है। 10 जनवरी की तरीख सुनवाई के लिए थी, लेकिन 29 जनवरी कर दिया गया है। सवर्णों के आरक्षण के मसले पर विपक्ष मजबूर नजर आया।

बीडीसी न्यूज

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