श्रीराम मंदिर पर केन्द्र का मास्टर स्ट्रॉक

नई दिल्ली 29 जनवरी 2017
अयोध्पा विवाद में केंद्र सरकार की पहल को पूरी तरह संवैधानिक बताते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सरकार की मंशा स्पष्ट की है। जावड़ेकर ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि संवैधानिक बेंच ने ही कहा था कि सरकार को निर्णय करना है कि जो बाकी जमीन है उसका क्या किया जाए। ऐसे में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में  यथास्थिति के आदेश को बदलने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर 1993 में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन को गैर-विवादित बताते हुए इसे इसके मालिकों को लौटाने के लिए अर्जी दी है।

जावडेकर ने बताया कि राम जन्मभूमि न्यास ने 2003 में अपील की थी लेकिन 10 साल कांग्रेस का राज था और उन्होंने इस पर कुछ नहीं किया। अब मोदी सरकार कर रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति की कोई बात नहीं है। रोज सुनवाई होने को पहले प्राथमिकता में रखा गया था लेकिन 5-6 महीने ऐसे ही निकल गए इसलिए सरकार ने यह पहल की है।

न्होंने कहा कि बीजेपी का पहले से स्टैंड साफ है कि मंदिर वहीं बने। जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस दो मुंह से बोलती रहती है। कांग्रेस हमेशा ही श्रीराम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल का यह तर्क कि मामले की सुनवाई जुलाई 2019 के बाद हो, इससे साबित हो जाता है। जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस तो राम को मानते ही नहीं हैं। राम सेतु पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हलफनामा देकर काल्पनिक बताया था।

जावड़ेकर ने आगे कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार की पहल को अनुमति दे देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि 0.313 एकड़ की जो विवादित जमीन है उस पर यथास्थिति बनी रहे, उसका कानूनी कामकाज और कोर्ट केस पूर्व की तरह चलता रहे। इसके अलावा भूमि के जिस हिस्से पर कोई विवाद नहीं है, सरकार उसे ही मूल मालिकों को वापस देना चाहती है।

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