टीडीपीके सूअर को पहनाएगी जनेऊ

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नीतीश मिश्र चेन्नई। 23 जुलाई 2017
भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते हुए वर्चस्व को रोकने के लिए देश भर में सभी राजनीतिक दल अपना हथकंडे प्रयोग कर रही है … ऐसा एक हथकंडा तमिलनाडु की टीपीडीके पार्टी ने भाजपा का विरोध करने के लिए एक नायाब तरीके का इजाद किया है। टीडीपीके सात अगस्त को सूअरों का उपनयन संस्कार करके दक्षिण के पंडितों को सामाजिक संदेश देना चाहती है। पार्टी से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि आज भी ब्राहमण समाज सूअरों को हेय दृष्टि से देखता है जबकि बराह के रूप में विष्णु का अवतार भी हो चुका है इसके बाद भी ब्राहमण समाज कभी सुअरों को पवित्र घोषित करने से परहेज करता रहा । गौरतलब है कि पेरियार बहुत पहले इसी धरती से सामाजिक सौहाद्र स्थापित करने के लिए कई तरह के अभिनव प्रयोग कर चुके है। बताया जा रहा है कि टीडीपीके ने सात अगस्त का दिन उपनयन के लिए इसलिए चुना है कि क्योंकि इस दिन तमिल समाज बहुत ही पवित्र दिन मानता आ रहा है। इस दिन तमिल ब्राहमण सामूहिक रूप से अपना जनेउ बदलने का काम करता है। टीडीपीके अध्यक्ष केएस कुमार कहते है कि ब्राहमण समाज हमेशा खुद को सबसे पवित्र घोषित करने से बाज नहीं आता है क्योंकि उसे लगता है कि उसी के पास केवल पवित्र धागा है। कुमार ने बताया कि अगर सूअर का भी उपनयन संस्कार कर दिया जाए तो हो सकता है ब्राहमण समाज इस जानवर के प्रति एक अलग तरह की सहानुभूति रखना शुरू कर दे। गौरतलब है कि इस विरोध को भले से धार्मिक रूप दिया गया हो लेकिन असलियत यही है कि इसके पीछे टीडीपीके अपना राजनैतिक वजूद बनाना चाहता है।

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