रंगशीर्ष नाट्य समारोह: क्रांतिकारी टंट्या का जीवन उतरा मंच पर

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भोपाल. 1 जुलाई 2017 सुमित पांडे
देश की आजादी में मालवा के क्रांतिकारी टंट्या के संघर्ष को समेटे नाट्क टंट्या को देखने का मौका शहीद भवन मंे मिला। रंगशीर्ष के तीन दिवसीय नाट्य समारोह की यह दूसरी प्रस्तुति थी, जिसका निदेशन वरिष्ठ रंग निदेशक संजय मेहता ने किया था, प्रकाश परिकल्पना लोकेन्द्र प्रताप सिंह की थी, गीत लिखा था दिनेश नायर ने। इन दोनों ही पक्षों ने नाट्क को प्रभावी बनाने में अहम रौल अदा किया।
नाटक की कथा वस्तु की बात करें तो नाटक मालवा के लोक नायक, क्रांतिकारी टंट्या भील के जीवन पर आधारित था, जिसे रंजना ने लिखा था। टंट्या के देश की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष और शोषित वर्ग के हित के लिए, समाज के ठेकेदारों से अंदर-बाहर दोनों मोर्चाें पर लड़ाई लड़ता है। अंत में इनाम के लालच में उसकी बहन का पति टंट्या की मुखबिरी अंग्रेजोें के लिए कर देता है… और टंट्या पकड़ा जाता है, अंग्रेज उसे फांसी पर चढ़ा देते हैं। लेकिन, उसकी शहादत ने आजादी की लौ कई युवाओं के सीने में प्रज्ज्वलित कर दी।
नाट्क में कमी की बात करें तो किरदारों का शोर कानों को कई बार चुभा.. कई बार किरदार एक दूसरे को अनसुना करते नजर आए। नाटक का गीत नाटक की जान था।

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