मंचन: सवाल पूछती संस्कृति, कहां ले जा रहा विकास

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संतनगर. 2017 सुमित पांडे
जनजाति संग्रहालय में श्रंखला अभिनय में नृत्य नाटिका संस्कृति का मंचन किया गया। मनुष्य जन्म से उसके क्रमिक विकास को दर्शाया गया। सधे हुए अभिनय से कलाकारों ने दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखा।
कथा की वस्तु मुनष्य के जन्म से उसके मनुष्य का खुद को समझने का बोध होने तक है। वह जन्म लेने के बाद प्रकृति, संस्कृति, समाज, सभ्यता, धर्म को समझता है, उसके हिसाब से आचरण करता है। बड़ा होने पर धर्म, संस्कृति के नाम में आपसी टकराव की स्थिति से गुजरता है। नाटक का अंत एक सवाल के साथ होता है, विकास किस ओर ले जा रहा है। नाटक का निदेशन तरूण दत्त पांडे ने किया। हर किरदार ने अपने अभिनय के साथ किया।

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