…. सुन लो शिवराज अरज हमारी

भोपाल. 27 जून 2017   आशा तिवारी
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को महाराष्ट्र, यूपी और पंजाब की सरकार के एक फैसले ने दबाव में ला दिया है। किसानों के कर्ज माफी का दूसरे राज्यों के फैसले से प्रदेश सरकार ने प्लान तैयार किया है, लेकिन उसकी उम्मीदें केन्द्र की मदद पर टिकी हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने दो टूक शब्दों में साॅरी कह दिया है।
किसानों की कर्ज माफी को लेकर प्रदेश में सियासत भी तेज हो गई हैं, जहां मंगलवार भाजपा प्रदेशभर में किसान संदेश यात्रा निकाल रही है वहीं, कांग्रेस किसान पंचायत का किसानों के सामने प्रदेश सरकार को कर्ज माफी के मुद्दे पर घेर रही है। भाजपा संगठन और सत्ता से जुडे़ लोग किसानों को आंदोलन के बाद उनके लिए किए गए सरकारी प्रयास गिना रहे हैं, नुक्कड़ सभाएं कर किसानों के बीच सरकार की छवि को उनकी चमकाने की रणनीति का हिस्सा है किसान संदेश यात्रा। संदेश यात्रा से पहले और किसान आंदोलन के बाद शिवराज सरकार ने तमाम घोषणाएं किसानों के लिए की है। बारिश में खराब होती प्याज के बाद भी 15 जुलाई तक खरीदी कर रही है। दूसरे पैदावारों को समर्थन मूल्यों पर खरीदने का ऐलान किया है।
भाजपा किसान संदेश यात्रा में किसानों को यह भी बताने की कोशिश करेगी कि किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए किस तरह पीछे कांग्रेस थी। किसान आंदोलन के बाद शिवराज सिंह का उपवास और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का सत्याग्रह सामने आया। शिवराज ने जहां मंदसौर गोली कांड में मारे गए किसानों के परिजनों के आग्रह पर उपवास खत्म करने की घोषणा 24 घंटे में की, वहीं सिंधिया ने 72 घंटे के सत्याग्रह को 48 घंटे में समेट दिया, लेकिन किसानों को लेकर सरकार के घेरने का ऐलान किया है। यह भी साफ है किसानों के मुद्दे को कांग्रेस 2018 में होने वाले चुनावों तक जिंदा रखेगी।
प्रदेश की माली हालत के चलते किसानों की कर्ज माफी का फैसला शिवराज सिंह के लिए आसान नहीं होगा। लेकिन येन केन प्रकेरण यह फैसला लेना सरकार की मजबूरी बन जाएगा। किसान भी दूसरे राज्यों को वास्ता देकर शिवराज से कहेंगे सुन लो अरज हमारी..

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