शुभकामनाएं… बीती ताहि बिसारिये आगे की सुध ले

आशा तिवारी
सकारात्मक सोच, नई ऊर्जा, नई उमंग… यानी बीती ताहि बिसारिये आगे की सुध ले… इसी अपेक्षा से नूतन वर्ष की शुभकामनाएं। क्या खोया यह नहीं सोचे, क्या पाया इसे लेकर आनंदित हों। देश को क्या दे सकते हैं, यह हमारी चिंता होनी चाहिए। अपेक्षा नहीं, बल्कि कर्त्तव्य की सोच के साथ आगे बढ़ें। जीवन का हर पल महत्वपूर्ण है, व्यर्थ न चला जाए। नए साल में यह संकल्प जिद्द की हद तक पहुंचना चाहिए। लक्ष्य जो भी हो लेकिन मेहनत की पराकाष्ठा होनी चाहिए।
वर्ष 2018 की खट्टी-मिठी यादें लेकर अलविदा हो रहा है, जो हो गया सो हो गया। अब क्या हासिल करना है, यह तय करना होगा। राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक स्तर पर बहुत कुछ घट रहा है। नेतृत्व में दृढ़ इच्छा शक्ति नजर आ रही है। विरोध के बाद बदलाव की दिशा में नेतृत्व लगातार बढ़ रहा है। यह कहने में कोई संकोच नहीं व्यवस्था में विजन नजर आ रहा है। भले नेतृत्व के फैसलों को लेकर बहस का प्लेटफार्म गर्म हो, लेकिन जनमानस में स्वीकारता का भाव दिख रहा है। नोटबंदी और जीएसटी की परेशानी झेलने के बाद भी राजनीतिक विरोध को छोड़ दिया जाए तो आम गुस्सा सड़कों पर नजर नहीं आया। इसकी वजह वह संभावनाएं जो देश को दुनिया के पटल पर स्वाभिमान से खड़ा करता है। आतंकवाद को लेकर लड़ाई में पाकिस्तान को अलग-थलग करने में भारत की कामयाबी हर भारतवासी के लिए खुशी की बात है।
मोदी सरकार बड़े फैसले लेने वाली सरकार के फ्रेम वर्क में काम कर रही है। परिणाम देरगामी होंगे, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि आम आदमी को अच्छे लगे हैं। गुड गवर्नेंस सरकारी व्यवस्था में हौले-हौले आ रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट की कसौटी पर भी सरकार के कठोर फैसलों को स्वीकार गया है, इसकी गवाही लगातार केन्द्र शासित भाजपा को देश में सरकारें बनाने में मिली कामयाबी है। भले कई प्रदेशों में सरकारों के गठन के लिए साम-दाम-दंड भेद की नीति अपनाई गई। आने वाले साल मध्यप्रदेश और केन्द्र की सरकारों को जनता के बीच जाना है, जो फैसलों को लेकर अपना फैसला सुनाएंगे।

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