रासुका आदेश: आप की घटिया राजनीति या नासमझी

आशा तिवारी . आम आदमी पार्टी के नेता की समझ में कमी है या वह घटिया राजनीतिक कर अपनी जमीन प्रदेश में तैयार कर रहे है। यह सवाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर 19 जून 2017 को जारी सरकार के आदेश के बाद आप की सक्रियता के चलते उठा है। आदेश को किसानों के आंदोलन और एक जुलाई से लागू हो रहे जीएसटी को लेकर व्यापारियों को आवाज को दबाने वाला बताया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि जिस आदेश पर राजनीति की जा रही है, वह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार का गृह विभाग हर तीन माह मंे जारी करता है। पांच आदेश बीडीसी न्यूज के पास हैं, जो छह अप्रैल से लेकर 19 जून के बाद जारी किए गए हैं। सभी आदेशों में भाषा एक सी है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक अक्षय हंुका इस आदेश को जीएसटी का विरोध और किसानों के आंदोलन से जोड़ कर व्याख्यायित कर रहे हैं। राजधानी में 24 घंटे का चेतावनी धरना दे रहे है। पांच आदेश की प्रतियां बीडीसी न्यूज डाल रहा है, जो समय-समय पर जारी हुई हैं
आदेशों मंे लिखा जाता है-
चूंकि राज्य सरकार के पास ऐसी रिपोर्ट है कि कतिपय तत्व साम्प्रदायिक मेल मिला को संकट में डालने के लिए लोक व्यवस्था तथा राज्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कोई कार्य करने के लिए सक्रिय है या उनके सक्रिय हो जाने की संभावना है।
राज्य के प्रत्येक जिले की स्थानीय सीमाओं के भीतर क्षेत्रों के विद्यमान परिस्थितियों को ध्यान रखते हुए, राज्य सरकार को यह समाधान हो गया है कि संबंधित जिला दंडाधिकारी को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 की उपधारा (3) के अंतर्गत अधिकृत किया जाना आवश्यक है।
अतएव राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग मंे लाते हुए, राज्य सरकार एतद द्वारा निर्देश देती है कि संबंधित जिला दण्डाधिकारी अपने जिले की स्थानीय सीमाओं के भीतर दिनांक से दिनांक तक (तीन माह की अवधि) तक निरोध का आदेश करने की शक्तियों का पालन कर सकेगा

रासुका को लेकर आप का चेतावनी अनशन

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