मैं नन्हा सा पौधा हूं… मेरी गिनती के लिए भी अभियान चलाना शिवराज

नन्हे पौधे की पाती शिवराज के नाम

शिवराज जी, नमस्कार
मैं एक नन्हा सा रूद्राक्ष कर पौधा हूं.. जिसे आपने रोपा है… हो सकता है मेरी जिंदगी बची रही, क्योंकि आपके हाथों से मैं धरती की कोख में सांस ले रहा हूं। मेरा सौभाग्य है मैं उस महा अभियान का पहला पौधा हूं, जिसे पर्यावरण की रक्षा के लिए उठाया गया बड़ा कदम बताया जा रहा है। मुझ जैसे छह करोड़ से अधिक पौधों को मां नर्मदा के पावन तट के दोनों ओर उस संकल्प के साथ रोपा गया है, जो आपने लिया है।
मैं अपनी बात एक सांची के पौधे से शुरू कर तो वह इसलिए क्योंकि उसकी जिंदगी बचाने के लिए लाखों सरकार खर्च कर चुकी है। मुझे बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना के समय श्री लंका के राष्ट्रपति ने रोपा था, उसकी सुरक्षा इसलिए की गई थी, क्योंकि जिन हाथों से उसे रोपा गया था, उनका विरोध था। इसलिए पहले दिन से मेरी हिफाजत इस तरह हो रही है, जैसे किसी इंसान की। भले ही मेरा बजूद इंसान सा न हो लेकिन इंसान के बजूद के लिए मेरा होना उतना सत्य है, जितना पूर्व से सूर्य का उदय होना।

CM shivraj singh chauhan
… जेहनों में अंधेरा है

मुझे कवि नीरज की ये पंक्तियों याद आ रही है… अजीब दौर है तरक्की का, जेहनों अंधेरा है.. सड़कांे पर उजाला है। विकास की कहानी में न जाने कितने पेड़ों की बलि चढ़ चुकी है, चढ़ती है और चढ़ती भी रहेगी। मैं सालों बाद जब वृक्ष बनता हूं तो विकास की कुल्हाड़ी मुझ पर चलती है। मेरी चिंता दुनिया या आपने यूं नहीं की.. धरती का तापमान बढ़ने के डर से मेरी चिंता हो रही है। चलो, जो भी हो कम से कम मेरी मौजूदगी जरूरत को विश्व समझ तो रहा है। जिस दिन से मैं धरती की कोख में लगता हूं उस दिन से हर पल खत्म होने का खतरा बना रहता है। नन्हा हुआ तो जनवरों का ग्रास बनता हूं। बड़ा हो गया तो काट दिया जाता हूं।

बहुत खुश हूं मैं

आज में बहुत खुश हूं, नर्मदा यात्रा मंे आपने संकल्प लिया पौधों की दुनिया तट पर बसाने की। सरकारी स्तर पर जो आप कर सकते हैं कर रहे हैं। आपके संकल्प के साथ पूरा महकमा जुड़ा है। गिनती जैसे भी की गई हो करोड़ों में है। तट के अलावा जो जहां था उसने पौधे रोपे। अच्छा लगा.. सोचा अब में पर्यावरण को बचाए रखने की अपनी ड्यूटी निभा पाऊंगा।
अनुभव अच्छा नहीं
शिवराजजी यह पहला मौका नहीं है जब जुलाई मंे पौधों को रोपने अभियान चला हो, इससे पहले सालों से इस तरह का अभियान कभी हरियाली उत्सव तो कभी पौधारोपण अभियान के नाम से मुझे धरती को समर्पित किया गया हो, लेकिन मेरा अनुभव अच्छा नहीं है। मुझे लगाए जाने के बाद कभी मेरी गिनती नहीं हुए मैं कितनी संख्या में बचा हूं… यानी जन्म तो हुआ, लेकिन कत्ल हो गया। कभी इंसान के हाथ तो कभी जानवर खा गया।

गिनती करने जरूर आना
शिवराजजी, अगले साल एक अभियान चलाना मेरी गिनती का। आपके अभियान पर मेरी रक्षा करने का संकल्प लेने वालों का वह रिपोर्ट कार्ड होगा। करोड़ों का आंकड़ा यदि हजारों में भी बचा तो मैं क्या धरती कहेगी धन्यवाद मध्यप्रदेश।

आशा तिवारी

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