खास पेड़ः सुरक्षा पर हर साल छह लाख खर्च करती है सरकार

भोपाल 06 जुलाई 2017 बीडीसी न्यूज
मध्यप्रदेश में एक पेड़ की सुरक्षा प्रदेश सरकार किसी वीआईपी की तरह करती है… पांच पुलिस कर्मी 24 घंटे तैनात रहते हैं। हर महीने 50 हजार रुपए खर्च किए जाते हैं, यानी साल में छह लाख रूपये खर्च होते हैं। ऐसा पांच साल से हो रहा है। इस पेड़ को श्री लंका के राष्ट्रपति महेन्द्रा राजपक्षे ने सांची बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना के समय सलामतपुर पहाड़ी पर रोपा था।
वैसे तो पौधे को खतरा जानवरों से होता है पर इस पौधे को जानवरों के अलावा इंसानों से भी खतरा था। खतरा उनसे था जो श्रीलंका के राष्ट्रपति के दौरे का विरोध कर रहे थे। तमिलनाडू के राजनीतिक दल श्रीलंका में तमिलों पर अत्याचार के दोषी राष्ट्रपति की भारत यात्रा का विरोध कर रहे थे। मध्यप्रदेश सरकार को आशंका थी कि श्रीलंका के राष्ट्रपति के दौरे का विरोध कर रहे तमिलनाडू के क्षेत्रीय राजनैतिक दल के कार्यकर्ता इस पौधे को नुकसान पहुंचा सकते हंै। इसीलिए इस पौधे को वीआीपी ट्रीटमेंट देने का निर्णय लिया गया।
सुरक्षा कवज में पेड़
पौधे की जानवरों से रक्षा के लिए 150 वर्ग फीट में 8 फीट ऊंचा लोहे की जालियों का सुरक्षा कवच बनाया गया और इंसानों से बचाने के लिए 1-4 का गार्ड तैनात कर दिया। शुरू में पेड़ की सुरक्षा में सशत्र पुलिस बल को लगाया गया। प्रशासनिक विवाद होने पर दो महीने में ही सशत्र पुलिस बल को हटाकर कोटवारों को पेड़ की सुरक्षा में लगा दिया बाद में कोटवारों को भी हटा दिया और नगर सैनिकों की ड्यूटी पेड़ की सुरक्षा में लगा दी गई। पहाड़“ी पर आम आदमी की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकैट भी लगाए थे, जो बाद में दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिए।
30 लाख हो चुके खर्च
मध्यप्रदेश सरकार 5 साल में इस पौधे की सुरक्षा में तकरीबन 30 लाख रुपए सिर्फ सुरक्षा कमियों के वेतन भत्ते पर खर्च कर चुकी है। इसके अलावा सरकार ने पहाड़ी पर पेड़ की सुरक्षा व पुलिस बल के ठहरने के लिए टेंट व टीन का शेड बनाने में भी लाखों रुपए फूंक दिए।
सुरक्षा कर्मी खतरे में !
बंजर पहाड़ी पर गर्मियों में सुरक्षा कर्मियों की अग्निपरीक्षा होती है। यहां न पीने का पानी है और न ही भीषण गर्मी से बचाव के लिए बिजली की व्यवस्था। सुरक्षा कर्मियों को कीड़े कांटों का डर बना रहता है। टार्च की रोशनी में सुरक्षाकर्मियों को रात गुजारना पड़ती है। कहने को पहाड़ी पर पानी की टंकी बनी है, जिसे नगर पंचायत का टैंकर हफ्ते में सिर्फ एक बार भरने आता है। यह सुरक्षाकर्मियों का ही साहस है जो इस इस टंकी का पानी पीने की हिम्मत रखते हैं। पेड़ की जिम्मेदारी उद्यानिकी, राजस्व, पुलिस और नगर पालिका की है।

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