सपाक्स : सीएम का कहना नहीं मानते अफसर

मान्यता का आश्वासन 21 दिन पहले दिया था, लेकिन नहीं मिली मान्यता
भोपाल । 03 अक्टूबर 12018
सपाक्स को 24 घंटे में मान्यता देने के सीएम आश्वासन और समन्वय के लिए नरोत्तम मिश्रा को अधिकृत करने से भी कुछ नहीं हुआ। आश्वासन के 21 दिन बीत गए हैं, लेकिन मान्यता आदेश जारी नहीं हुआ है। सपाक्स नेताओं ने कहा कि सीएम कुछ भी कहें, होता वही है- जो सामान्य प्रशासन विभाग के अफसर करते हैं।

सपाक्स की आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा है कि मुख्यमंत्री 13 सितंबर को सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) के प्रतिनिधि मंडल को अपने निवास पर बुलाकर २४ घंटे में संस्था को शासन की मान्यता जारी किए जाने का आश्वासन दिया थ। नरोत्तम मिश्रा मंत्री म प्र शासन की उपस्थिति में दिया था और उन्हें तत्काल मान्यता जारी करने हेतु समन्वय करने के निर्देश दिए थे।
सामान्य प्रशासन के तथाकथित अधिकारी सपाक्स की मान्यता किसी भी हालत में नहीं होने देना चाहते। ऐसा लगता है कि वे ख़ुद को मुख्यमंत्री के ऊपर मानते है तथा एक संगठन विशेष से जुड़े है। ऐसे अधिकारियों ने मान मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना करने में कोई कसर नही छोड़ी है और उन्होंने ये साबित भी कर दिया है कि सामान्य प्रशासन विभाग में उनकी मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नही हिलता फिर भले ही मुख्यमंत्री जी का आदेश कुछ भी हो। आलम यह है कि १-२ दिन में आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी और सरकार संस्था को मान्यता देने योग्य ही नहीं रहेगी।

सरकार आरक्षण और पदोन्नति में आरक्षण की नीतियों में हमेशा से एक वर्ग विशेष के प्रति झुकाव और बहुसंख्यक वर्ग की अपेक्षा करती रही है जबकि मान न्यायालय लगातार अन्याय को नकारते हुए निर्णय दे रहे हैं लेकिन सरकार लगातार निर्णयों की उपेक्षा कर रही है।
संस्था की माँग है कि मुख्यमंत्री इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संस्था को आचार संहिता लगने के पूर्व मान्यता प्रदान करें और मान्यता की फ़ाइल लंबित रखकर सपाकस वर्ग के शासकीय कर्मियों में सरकार के विरुद्ध आक्रोश पैदा करने वाले सामान्य प्रशासन के ज़िम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करें।

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