परिषद में पहुंचे हनुमानजी, पार्षदों ने की आरती

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भोपाल। 31 मार्च 2018

हंगामे और शोर-शराबे के बीच महापौर आलोक शर्मा ने अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश किया। महापोर ने नगर निगम का 1995 करोड़ 94 लाख 72 हज़ार रुपये का बजट पेश किया है। बजट में स्मार्ट सिटी के साथ महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा के लिए शहर में महिला पुलिस चौकी बनाने की घोषणा की गई। महापौर के भाषण के दौरान कांग्रेसी पार्षदों ने काले झंडे दिखाए।… कांग्रेसी पार्षदों की सुरक्षा कर्मियों से झूमाझटकी भी हुई।

महापौर आलोक शर्मा ने हंगामे के बीच वित्तीय वर्ष 2018-19 का घाटे का बजट पेश किया… इस बार बजट 1995 करोड़ 94 लाख 72 हजार रूपये का है। बजट राशि में से पांच फीसदी राशि सुरक्षा निधि के रूप में रखी गई हैं… विधानसभा चुनाव को देखते हुए बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया… महिला सुरक्षा और ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने को लेकर निगम ने फोकस किया है। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निगम ने 2 करोड़ की राशि महिला पुलिस चौकी के लिए निर्धारित किया है… बैरागढ़ अग्निकांड से सबक लेते हुए स्मार्ट फायर कंट्रोल साथ ही ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने के लिए सिटी म्यूजियम बनवाने की भी महापौर ने घोषणा की।

हनुमानजी की आरती
हनुमान जयंती के दिन बजट बैठक बुलाने को लेकर खासा विवाद हुआ… कांग्रेस पार्षद दल ने हनुमानजी की आरती कर बैठक को हंगामेदार बना दिया।.. महापौर ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया है, वहीं कांग्रेस ने पूछा है कि हनुमानजी की आरती करना क्या, कोई गुनाह है।
कांग्रेस और भाजपा ने प्रायोजित तरीके से नगर निगम की बजट को हंगामेदार बनाया। कांग्रेस पार्षद दल ने हनुमान जंयती दिन बैठक बुलाने का विरोध करते हुए योजनाबद्ध तरीके से परिषद की बैठक में हनुमानजी की प्रतिमा लाकर आरती की… महापौर और भाजपा पार्षदों ने इसे हनुमानजी का अपमान बताते हुए नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद सगीर की टेबिल पर जाकर तीखी नाराजगी दर्ज कराई। इसके बाद महापौर आलोक शर्मा ने हनुमानजी की प्रतिमा को उठाकर उसे यथास्थान पर रखा। इस मौके पर कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच नूरा – कुश्ती का दौर चलता रहा। महापौर ने आलोक शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने आज हिंदू धर्म का अपमान किया है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद सगीर ने कहा कि हनुमानजी की आरती करना कोई गुनाह थोड़े ही है। कांग्रेस पार्षद दल ने निगम अध्यक्ष को बहुत पहले ही हनुमान जयंती के मौके पर बजट पेश न करने को लेकर ज्ञापन दिया था… हालांकि निगम अध्यक्ष ने उस समय उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया था। अगर निगम अध्यक्ष पहले ही गंभीर हो जाते तो हनुमानजी परिषद के विषय नहीं बनते ।

 

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